Tuesday, December 24, 2013

भूल जाइये पेनड्राइव को और इस्तेमाल कीजिये क्लाउड स्टोरेज पढ़िये क्यूँ !

मानो या ना मानो
भूल जाइये पेनड्राइव को और इस्तेमाल कीजिये क्लाउड स्टोरेज 
पढ़िये क्यूँ   

पेन ड्राइव है झंझट का नाम
इस कमबख्त 'पेन ड्राइव' के साथ यही मुसीबत है. लोग अकसर वायदा करके लाना भूल जाते हैं. या फिर, भूल जाने का बहाना कर देते हैं. क्योंकि पेन ड्राइव जो लेता है, वो लौटाना भूल जाता है. जिस पेन ड्राइव को आप बहुत संभाल कर रखते हैं, वो जाने कैसे गुम हो जाता है. जो गुम नहीं होता, वो पता नहीं कहां छिप जाता है कि मौके पर मिलता ही नहीं! लेकिन सबसे ज्यादा गुस्सा तब आता है जब आप देखते हैं पेन ड्राइव के भीतर सहेज कर रखी गयी ज़रूरी फाइल, ऐन वक्त पर खुलने से ही इनकार कर देती है. जब आप कोशिश कर के हार जाते हैं तब पता चलता है कि फाइल 'करप्ट' हो चुकी है - यानी फाइल इस तरह खराब हुई है कि अब हमेशा के लिए गयी.
गानों के साथ वायरस मुफ्त
ये तो आपको पता ही है कि पेन ड्राइव, कंप्यूटर में वायरस फैलाने का सबसे बड़ा ज़रिया है. दोस्त का पेन ड्राइव आपने लैपटॉप में लगाया नहीं कि गानों और फोटो के साथ वायरस मुफ्त में मिल गए. अब करते रहो एंटी-वायइस से छानबीन. अगर आप किसी भारी सुरक्षा वाली सरकारी बिल्डिंग में गए होंगे तो आपको पता ही होगा कि गेट पर सुरक्षा जांच के समय बैग में पड़ा पेन ड्राइव कितनी बड़ी मुसीबत बन जाता है.
कितनी बार आपके मन में आया होगा कि कोई ऐसा तरीका होता की बड़ी फाइल्स भी किसी को एक बार में ही, उसी तरह पल भर में भेज पाते, जैसे ईमेल भेजते हैं. कोई ऐसा तरीका, जिससे पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड, लेने-देने का चक्कर ही खत्म हो जाए. न वाइरस का खतरा हो, न गुम होने का डर और न ही फाइल करप्ट होने की टेंशन.
जरूरी फाइलों का बैकअप, डेटा की सिक्योरिटी
Cloud storage (क्लाउड स्टोरेज) का इस्तेमाल करके आप बड़ी से बड़ी फाइल, बिना अटैचमेंट वाली ईमेल की तरह किसी को आसानी से भेज सकते हैं. यही नहीं, आपकी फाइल भी हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाती है- उसकी एक बेहद भरोसेमंद बैक-अप कॉपी तैयार हो जाती है. इसके बाद आपका पेन ड्राइव, मेमोरी कार्ड तो क्या, पूरा फोन, कंप्यूटर भी गुम हो जाए, खराब हो जाए, अचानक फॉरमेट-रीसेट करना पड़े, तब भी आपका data (डेटा) कहीं नहीं जाएगा. फोटो, गाने, डाक्यूमेंट्स, वीडियो क्लिप्स - सब के सब, कुछ कुछ ही मिनटों में, फिर से आपके सामने होंगे. आपका डेटा 'क्लाउड' में होने का ये भी मतलब है कि आप इंटरनेट से क्नेक्टेड किसी भी कंपयूटर या मोबाइल पर लॉग इन करके अपनी फाइल पा सकते हैं. कोई जरूरत नहीं कि हर जगह अपना लैपटाप साथ ले जाएं.
ईमेल से भी आसान
क्लाउड स्टोरज का नाम तो ज्यादातर लोगों ने सुना है, पर जाने क्यों, रात दिन ईमेल पर जीने वाले भी बहुत से लोग इसका इस्तेमाल नहीं करते. क्लाउड स्टोरेज का मतलब है कि आपका डेटा, आपकी फाइल, आपके फोन और कंप्यूटर के अलावा किसी दूसरी जगह, किसी कंपनी के कंप्यूटर पर भी मौजूद रहता है, आपके यूजर नेम और पासवर्ड के साथ. इसे रिमोट सर्वर भी कहते हैं. आप जब चाहें, इंटरनेट की मदद से रिमोट सर्वर पर मौजूद अपने डेटा को हासिल कर सकते हैं, उसमें कोई बदलाव कर सकते हैं, किसी के साथ उसे शेयर कर सकते हैं या फिर उसे हमेशा के लिए डिलीट कर सकते हैं. ठीक उसी तरह जैसे आप किसी भी कंप्यूटर पर लॉग इन करके अपना मेल चेक करते हैं.
मु्फ्त है ये सर्विस
ईमेल की तरह ही, तमाम कंपनियां कुछ सीमा तक क्लाउड स्टोरेज की सुविधा मुफ्त देती हैं. अगर आपको ज्यादा डेटा रखना है तो सलाना कुछ फीस देकर आप जितनी चाहे स्पेस खरीद सकते हैं. लेकिन मुफ्त में भी क्लाउड स्टोरेज पर आप इतनी जगह हासिल कर सकते हैं कि आप अपने जरूरी कागजात, म्यूजिक कलेक्शन, बहुत सी फोटो संभाल कर रख सकते हैं. क्लाउड स्टोरेज पर रखी हुई किसी भी फाइल को शेयर करने के लिए न तो पेन ड्राइव की जरूरत है, न ही मेमोरी कार्ड की. पेन ड्राइव लेने देने का झंझट ही खत्म और आपका डाटा का एक बैकअप भी आपके पास हर वक्त तैयार. किसी भी कंप्यूटर पर अपनी तमाम फोटो, जब चाहे देखो. कभी भी, अपने चुनिंदा गानों के कलेक्शन का आनंद लो.
बस इतना ध्यान रहे
लेकिन क्लाउड स्टोरज का और गुणगान करने से पहले हम आपको इसकी कुछ कमियों के बारे में भी बता दें. ये तो आप समझ ही सकते हैं कि क्लाउड स्टोरेज पर रखी गयी किसी चीज को किसी दूसरे कंपयूटर या मोबाइल पर हासिल करने के लिए इंटरनेट का कनेक्शन होना जरूरी है. इसके बगैर आप अपने फोन या कंपयूटर पर तो उसे देख सकते हैं लेकिन किसी को भेज नहीं सकते. इंटरनेट अगर धीमा है तो बड़ी फाइल (खास तौर पर वीडियो) को अपलोड करना और डाउनलोड करना दोनों बेहद बोरिंग हो जाता है. और ये बात भी आपको याद रखनी होगी कि बड़ी फाइल्स को क्लाउड पर अपलोड करना और डाउनलोड करना इंटरनेट का बिल बढ़ाता है. लेकिन अगर आपके पास तेज स्पीड वाला इंटरनेट कनेक्शन है (जैसे वाई-फाई या 3 जी), और आप अनलिमिटेड डाटा प्लान इस्तेमाल कर रहे हैं तो आप दिल खोल कर क्लाउड सर्विस का मज़ा ले सकते हैं.
दूसरी गांठ बांध लेने की बात ये ही कि कोई भी कंपनी, कुछ भी दावा करे - सच्चाई ये है कि जो कुछ भी इंटरनेट पर डाला गया है वो सबकुछ हैक हो सकता है - यानी गलत लोगों के हाथ में पहुंच सकता है. इसलिए कभी भी, बेहद गोपनिय चीजें - जैसे बैंक डिटेल्स, क्रेडिट कार्ड, पासवर्ड और बेहद निजी फोटो, वीडियो - इंटरनेट पर नहीं डालें. अगर कोई चीज बेहद जरूरी है, तो उसका एक और बैकअप किसी और जगह जरूर रखें.
जो चाहो वो चुनो
क्लाउड स्टोरेज का इस्तेमाल करना बेहद आसान है. Dropbox (ड्रापबॉक्स), Google Drive (गूगल ड्राइव), Sky Drive (स्काई ड्राइव), Sugar Sync (शुगरसिंक), Box (बॉक्स) जैसी तमाम सर्विस में से अपनी पसंद की कोई भी क्लाउड सर्विस चुनें. सिर्फ एक बार, जो भी क्लाउड स्टोरेज सर्विस आप इस्तेमाल करना चाहें, उसका छोटा सॉफ्टवेयर अपने कंपयूटर या फोन में डाउनलोड कर लें. कौन सी क्लाउड सर्विस सबसे अच्छी है इस बहस में ज्यादा पड़ने की जरूरत नहीं है. सबकी अपनी खूबियां और कमियां हैं. और किसी ने आप पर ये पाबंदी तो लगाई नहीं कि आप सिर्फ एक ही क्लाउड सर्विस इस्तेमाल कर सकते हैं. आप चाहें तो, एक साथ कई क्लाउड सर्विस का इस्तेमाल अलग अलग चीजों के लिए कर सकते हैं. जैसे मैं ड्रापबॉक्स में अपना म्यूजि़क का कलेक्शन रखता हूं, गूगल ड्राइव में फोटो का बैकअप रखता हूं और स्काई ड्राइव में अपने वीडियो क्लिप्स.
लेकिन शुरूआत आप Dropbox (ड्रॉपबॉक्स) या Google Drive (गूगल ड्राइव) से कर सकते हैं जो बेहद लोकप्रिय और भरोसेमंद हैं.
Dropbox (ड्रॉपबॉक्स) पाने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें.
https://www.dropbox.com/downloading?src=index
Google Drive (गूगल ड्राइव) पाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें.
https://tools.google.com/dlpage/drive
बस दो मिनट चाहिए
अब अपना एक यूज़र नेम और पासवर्ड बना लें. बस, हो गया आपका काम. आपके कंपयूटर पर अब ड्रॉपबॉक्स या गूगल ड्राइव का एक आइकन बन गया होगा. सुविधा के लिए इस आइकन को डेस्कटॉप पर, यानी नजर के सामने रखें. जिस भी फाइल को आप शेयर करना चाहते हैं उसको बस उठा कर इसके भीतर डाल दें - कॉपी करके या कट - पेस्ट करके. आपकी फाइल के साइज और आपके इंटरनेट की स्पीड के मुताबिक कुछ मिनटों में ये फाइल सिंक हो जाएगी - यानी ये फाइल अब क्लाउड पर चली गयी. कहने का मतलब ये की अब आपके इस फाइल की एक कॉपी ड्रॉपबॉक्स के सर्वर पर भी बन गयी है.
एक बार आपकी फाइल रिमोट सर्वर पर, यानी ड्रापबॉक्स पर अपलोड हो गयी तो उसको शेयर करना बांए हाथ का खेल है. अब आप उसे पूरी फाइल नहीं, सिर्फ एक लिंक भेजेंगे. और जिसके पास ये लिंक है, वो सीधे ड्रॉपबॉक्स के कंपयूटर से इसे डाउनलोड कर लेगा. है न आसान तरीका ? अगर आप चाहें तो किसी दूसरे आदमी को ये अधिकार भी दे सकते हैं कि आपकी फाइल में कोई बदलाव कर सके, उसमें कुछ जोड़ सके, या हटा सके. जैसे आप कोई प्रोजेक्ट बना रहे हैं और उस पर सलाह लेने के लिए अपने दोस्त या टीचर को दिखाना चाहते हैं.
इसी तरह, अगर आप, दोस्तों के साथ मिलकर गानों का एक कलेक्शन बनाना चाहते हैं तो अपने म्यूजिक फोल्डर को ड्रॉपबॉक्स में डाल दें . फिर dropbox.com पर जाएं जो आपको ड्रॉपबॉक्स के फोल्डर के भीतर ही दिख जाएगा. dropbox.com पर जाते ही आपको अपने सभी फोल्डर दिखेंगें . जिस फोल्डर को शेयर करना चाहते हैं, उस पर right click करें. आपको तमाम ऑपशन्स दिखेंगें. अगर आप Invite to folder का ऑपशन् चुन कर दोस्तों के साथ शेयर करेंगें, तो वो इसमें बदलाव भी कर सकते हैं . अगर आप सिर्फ share link करेंगें तो आपके दोस्त उस फाइल को डाउनलोड तो कर सकते हैं, लेकिन उसमें कुछ बदलाव नहीं कर सकते. फोल्डर पर right click करने पर आपको जो और ऑपशन दिखतें हैं, उसका इस्तेमाल अपनी जरूरत के हिसाब से कर सकते हैं.
अब चुटकी में करो कुछ भी शेयर
जहां चाहो वहां पाओ अपना Data
क्लाउड सर्विस को इस्तेमाल करने का मजा तब और बढ जाता है जब आपकी हर फाइल, हर फोटो, म्यूजिक - उन तमाम कंपयूटर, फोन, टैबलेट पर पर मौजूद रहे जो आप रोज इस्तेमाल करते हैं . इसके लिए ड्रॉपबॉक्स (या गूगल ड्राइव, या जो भी क्लाउड सर्विस आप इस्तेमाल कर रहें हों ) को हर डिवाइस पर डाउनलोड कर लें. लेकिन लॉग इन करने के लिए अपना वही यूजरनेम और पासवर्ड इस्तेमाल करें जो आपने पहली बार बनाया था. अब आपके काम की हर फाइल, हर जगह मौजूद है. आप अगर किसी फाइल में कुछ बदलाव करते हैं - तो वो दूसरी जगह खुद ब खुद बदला हुआ दिखेगा.
तो हो गयी न पेन ड्राइव की छुट्टी ? पेन ड्राइव का इस्तेमाल अब तभी करें जब जो फाइल आप भेजना चाहते हैं वो बहुत बड़ी हो - जैसे पूरी की की पूरी फिल्म. क्योंकि बहुत बड़ी फाइल को क्लाउड पर डालने में समय ज्यादा लगेगा और इंटरनेट मुफ्त या अनलिमिटेड प्लान नहीं है तो आपका बिल ज्यादा बढ़ सकता है. लेकिन जिसके साथ फाइल शेयर करनी हो वो अगर वो अगर किसी दूसरे शहर में रहता है तब क्या करेंगें ?
पसंद आपकी है, चाहें तो फाइल को पेन ड्राइव में डाल कर कूरियर से भेजें या फिर क्लाउड सर्विस की शरण में आएं.


Monday, June 10, 2013

4 Steps For A Better Website Development Process

Launching a new website or redeveloping your current one sounds simple enough, right? But there’s actually a lot to consider before you dive into the world of Web development, and it runs much deeper than defining a price.
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A website isn’t a product, it’s a service. This makes choosing a Web development agency quite a challenge. In fact, I’d go as far as saying that it’s the reason why roughly 80 percent of companies have had a terrible experience when it comes to launching a new website.
Here’s why:
  1. Web development is a fairly new industry with very little standards.
  2. What you’re buying is hard to understand, which leads to unrealistic expectations.
  3. It takes more time to properly define the development process than it does to create the entire site.
  4. The plan for website development is often defined by the client instead of being a joint decision between the agency and the client.
  5. Good Web marketing employees are hard to find and expensive for agencies to hire.
Getting a new website isn’t like getting a roof. It goes far beyond simply figuring how much space you need to cover and what types of materials you need to get the job done. When it comes to building a website, no project or requirement is quite like the other. Because of this, the way someone goes about buying a website and working with a Web marketing agency is far from standardized. It’s time to reinvent your approach–here’s how:
Step 1: Figure out your goals. Your company should come into the building process with a clear picture of what you’d like to accomplish from a business perspective, not in terms of website features and layout.
How do you measure success of the project? What experience does the user want and need? How can you make their visit to your website a success? Many people tend to look at their competitor’s website for answers. Stop! Instead, consider what you’re trying to accomplish. This is your website.
Step 2: Choose a price range. By establishing clear business objectives and a price range, you’re ensuring you will get your money’s worth. The agency will lay out the options that are the best match for your business needs. Through this, they will finalize the price point so you know where your money is being spent.
Step 3: Let your agency transform your objectives. In order to speed up the development process, the best thing you can do is allow the team to come up with their own ideas for meeting your business objectives. You of course should be providing feedback in regard to their ideas, but be sure to keep it at “business level” rather than honing in on features. Work with the team at the agency as partners and friends. This will create an ease of interaction throughout the project and ensure better end results.
Step 4: Trust your agency to help derive an end figure. The best question to ask your potential Web marketing agency is not how much thewebsite will cost, but how their team will work with you to achieve your business objectives. Trust their expertise and ability to recognize your goals and decide what it takes to reach them — a figure will be born from this.
For example, if you compare website development to the real estate industry, it’s similar to saying, “I like the building at 5000 Sunset Boulevard. How much would it cost for the same building?”
Your real estate agent has no idea what your overall goal is for the building or the logistics of the structure, like the number of floors in the building, office space, materials used, etc. Real estate building plans, just like website building plans, involve a lot of questions–and the answers often take time.
The process of building a website involves trust. Trust the agency you’ve chosen is going to accommodate you to the best of their ability and knowledge, while also meeting your price requirements. This level of trust will not only create a lasting agency-client relationship, but will result in a great end-product that will accelerate your business.